加州靡情
书名:伐木累|作者:笑无语|本书类别:古言|更新时间:05:51:27|字数:3896字
A | लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत त्योहारों की भूमि है और इन्हीं में से एक है गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2025), जिसे गणेशोत्सव और कहीं-कहीं विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माने जाने वाले गणपति को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है।,गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर दस दिनों तक चलता है। इन दिनों भक्तजन घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित करते हैं। रोजाना पूजा, आरती और भजन होते हैं और अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर बड़े धूमधाम से प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।,इस वर्ष गणेशोत्सव 27 अगस्त से 6 सितंबर 2025 तक मनाया जाएगा। आइए जानते हैं, भारत के अलग-अलग राज्यों में गणेशोत्सव की कैसी झलक देखने को मिलती है।
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मुंबई का नाम आते ही सबसे पहले ध्यान आता है- लालबागचा राजा। यहां विशाल पंडाल, भव्य मूर्तियां और लाखों की भीड़ देखने लायक होती है। सड़कों पर गूंजते “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे शहर को त्योहारमय बना देते हैं। समुंदर किनारे भव्य विसर्जन शोभायात्रा इसकी सबसे खास पहचान है।,दिल्ली में गणेशोत्सव एक बहुरंगी रूप लिए होता है। यहां अलग-अलग राज्यों से आए लोग अपनी-अपनी परंपराओं के साथ गणपति का स्वागत करते हैं। कुछ जगह विशाल पंडाल सजते हैं तो कहीं वैदिक मंत्रों और भजनों के बीच पूजा होती है। यह राजधानी की बहुसांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।,गोवा में इस पर्व को चावथ कहा जाता है। यहां घर-घर में मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। रिश्तेदारों से मिलने की परंपरा है और मिठाइयों में खासतौर पर नेवरी और पटोलेओ बनते हैं। साथ ही, गोवा की लोक-कलाएं और नृत्य इस पर्व में खास रंग भरते हैं।,तमिलनाडु में यह पर्व विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यहां गणेश पूजा से पहले माता गौरी की आराधना होती है। घरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर भक्ति गीत गाए जाते हैं। खास मिठाई कोझुकट्टई (मोदक जैसा व्यंजन) हर घर की रसोई में बनता है।,हैदराबाद का खैरताबाद गणपति देशभर में मशहूर है। यहां कई बार 60 फीट तक की मूर्तियां बनाई जाती हैं। भगवान को विशाल लड्डू अर्पित किया जाता है, जो बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यहां के उत्सव में श्रद्धा और भव्यता दोनों साथ चलते हैं।,पुणे के गणेशोत्सव की अपनी अलग ही धूम है। यहां घर-घर में सजावट, पारंपरिक नृत्य और लोकसंगीत का माहौल होता है। मिठाइयों में मोदक और लड्डू का विशेष महत्व है। पुणे का गणेशोत्सव अपनी गरिमा और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।,कर्नाटक में गणेशोत्सव पहले गौरी पूजा से आरंभ होता है। इसके बाद घरों और पंडालों में गणेशजी की प्रतिमाएं रखी जाती हैं। लोग मोदकम, पायसम और गोज्जु जैसे व्यंजन बनाते हैं। बेंगलुरु और मैसूर जैसे शहरों में सामूहिक भजन, नृत्य और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।,हालांकि कोलकाता में दुर्गा पूजा सबसे बड़ा पर्व है, लेकिन गणेशोत्सव भी यहां लोकप्रिय होता जा रहा है। परिवार और समाज मिलकर प्रतिमाएं स्थापित करते हैं, पूजा और भक्ति गीतों के साथ त्योहार मनाते हैं। स्थानीय कला और सजावट यहां की खासियत होती है।,इन राज्यों में इसे विनायक चविति कहा जाता है। गांव-गांव और शहरों में प्रतिमाएं स्थापित कर भक्ति गीत गाए जाते हैं। आंध्र प्रदेश के कनीपाकम गांव का 21 दिन चलने वाला ब्रह्मोत्सव विशेष आकर्षण होता है।,गुजरात में गणेशोत्सव घरों और मंदिरों में बड़े सादे लेकिन भक्ति भाव से मनाया जाता है। अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में भव्य शोभायात्राएं निकलती हैं। ओडिशा और बंगाल में भी पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ यह पर्व धीरे-धीरे लोकप्रियता पा रहा है।,गणेशोत्सव पूरे भारत को एक सूत्र में बांधता है। कहीं इसे परंपरा से, कहीं भव्यता से और कहीं मिठाइयों व सांस्कृतिक आयोजनों से मनाया जाता है, लेकिन सब जगह एक ही भाव है- “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!” यह भी पढ़ें- भारत का इकलौता मंदिर, जहां विराजे हैं बिना सूंड वाले गणेश जी! भक्त चिट्ठी लिखकर मांगते हैं मन्नत यह भी पढ़ें- आखिर क्यों लगाया जाता है Ganpati Bappa Morya का जयकारा? दिलचस्प है गणेश जी के इस नाम की कहानी。 आशीष झा, रांची। राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान को सिंगापुर की तर्ज पर बदला जाएगा। इससे जैविक उद्यान को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही कमाई के साधन भी बढ़ाए जाएंगे। चिड़ियाघर में जानवरों की देखरेख से लेकर कर्मियों को मानदेय भुगतान के लिए अब किसी सरकार पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। तैयारियों के अनुसार चिड़ियाघर की आमदनी ही इतनी बढ़ जाएगी कि खुद के कार्यों के लिए किसी आर्थिक मदद की आवश्यकता नहीं होगी।,कार्यप्रणाली को समझने के लिए अधिकारियों का दल सिंगापुर और वियतनाम के लिए रवाना हो चका है। तीन-चार दिनों में सभी लौटकर आ भी जाएंगे। झारखंड में जैविक उद्यानों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर सरकार रणनीति बनाने की तैयारियों में है। इसके लिए सिंगापुर का मॉडल अपनाने की बात की जा रही है। वहां के जैविक उद्यान के संचालन के लिए किसी की मदद की आवश्यकता नहीं होती है। यह दुनिया के सबसे महंगे चिड़ियाघरों में से एक है। इसके साथ ही इस चिड़ियाघर में लुप्तप्राय जानवरों के संरक्षण के लिए काम किया जाता है।,ऐसे पशुओं की प्रदर्शनी के माध्यम से चिड़याघर की आमदनी में इजाफा होता है। प्रदर्शनी नियमित तौर पर होते हैं। सिंगापुर का चिड़ियाघर ओपन कंसेप्ट डिजाइन पर बनाया गया है। इसमें कई बार ऐसा लगता है कि जानवर अपने प्राकृतिक आवास में मनुष्यों के बेहद करीब मौजूद हैं। हालांकि जानवरों और आगंतुकों के बीच बड़ी खाई, कांच और प्राकृतिक रुकावटें बनाई गई होती हैं।,सिंगापुर के चिड़ियाघर में 300 से अधिक प्रजातियों के चार हजार से अधिक जानवर मौजूद हैं। इतना ही नहीं, इस चिड़ियाघर में जो लुप्तप्राय जानवरों के संरक्षण का काम भी किया जाता है। जानवरों को खुले प्रदर्शनों में रखा जाता है, जिससे वे अपने प्राकृतिक व्यवहार का प्रदर्शन कर पाते हैं।,यहां के चिड़ियाघरों में विभिन्न प्रकार के जानवर मौजूद हैं। शांत शाकाहारी से लेकर सबसे खतरनाक जानवर तक शामिल हैं। इस चिड़ियाघर में बच्चों के लिए खास क्षेत्र बनाया गया है जहां पानी से संबंधित खेल, बाधा दौड़ आदि खेल जानवरों के साथ खेले जा सकते हैं।,चिड़ियाघर के अंदर कई खाने-पीने के विकल्प उपलब्ध होंगे जिनमें स्वदेशी व्यंजन से लेकर पश्चिमी फास्ट फूड तक शामिल हैं। सिंगापुर चिड़ियाघर मंडई वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है, जिसमें नाइट सफारी और बर्ड पैराडाइज़ जैसे अन्य आकर्षण भी शामिल हैं।,सिंगापुर के चिड़ियाघर का अध्ययन करने के लिए वन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीख पी. के नेतृत्व में चार अधिकारियों का दल सिंगापुर और वियतनाम गया है। यहां के चिड़ियाघरों की तर्ज पर झारखंड में भी बदलाव लाने की कोशिश की जाएगी। इस दल में पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) पारितोष उपाध्याय, बिरसा जू के निदेशक जब्बार सिंह, रांची के डीएफओ श्रीकांत वर्मा भी गए हैं।。



